आप अपने मित्रों के साथ मैदान में खेलते हैं और कई बार हार भी जाते हैं। तब आपको कैसा लगता है और आप अपने मन को कैसे समझाते हैं? एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए-
उत्तर:जब मैं अपने मित्र के साथ मैदान में खेलता हूँ तो यह सोचता हूँ कि जीत मेरी ही होगी क्योंकि हारना किसी को पसंद नहीं लगता हैं। किंतु कभी-कभी मैं खेल में हार भा जाता हूँ तब मुझे बहुत बुरा लगता है। वैसी स्थिति में हम यह सोचकर मन को समझाते हैं कि खेल में हार-जीत तो होती ही रहती है। दूसरों की जीत पर हमें खुश होना चाहिए और इसी उम्मीद में रहना चाहिए कि अगली बार मेरी जीत अवश्य होगी।
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