Friday, February 19, 2021

Attendance 20 Feb

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अपठित पद्याँश

 

9. निम्नलिखित काव्यांश तथा उन पर आधारित प्रश्नोत्तर ध्यानपूर्वक पढ़िए

चिड़िया को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बड़ी है, निर्मम है.
वहाँ हवा में उसे
बाहर दाने का टोटा है
यहाँ चुग्गा मोटा है।
बाहर बहेलिए का डर है
यहाँ निद्रवर कंठ-स्वर है।
फिर भी चिड़िया मुक्ति का गाना गाएगी,

अपने जिस्म की गंध तक नहीं मिलेगी।
यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है।
मारे जाने की आशंका से भरे होने पर भी
पिंजड़े से जितना अंग निकल सकेगा निकालेगी,
हर सू जोर लगाएगी
और पिंजड़ा टूट जाने या खुल जाने पर उड़ जाएगी।

प्रश्न
(क) पिंजड़े के बाहर का संसार निर्मम कैसे है?
(ख) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
(ग) कवि चिड़िया को स्वतंत्र जगत् की किन वास्तविकताओं से अवगत कराना चाहता है? 
(घ) बाहर सुखों का अभाव और प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति ही क्यों चाहती है? 
(ङ) कविता का संदेश स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर-
(क) पिंजड़े के बाहर संसार हमेशा कमजोर को सताने की कोशिश में रहता है। यहाँ सदैव संघर्ष रहता है। इस कारण वह निर्मम है।

(ख) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को पानी, अनाज, आवास तथा सुरक्षा उपलब्ध है।

(ग) कवि बताना चाहता है कि बाहर जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। भोजन, आवास व सुरक्षा के लिए हर समय मेहनत करनी होती है।

(घ) बाहर सुखों का अभाव व प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति चाहती है, क्योंकि वह आजाद जीवन जीना पसंद करती है।

(ङ) इस कविता में कवि ने स्वाधीनता के महत्व को समझाया है। मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास आजाद परिवेश में हो सकता है।

Thursday, February 4, 2021

स्वामी दयानंद सरस्वती (अनुच्छेद )

 स्वामी दयानंद सरस्वती (अनुच्छेद )


स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म सन् 1824 ई. को गुजरात के टंकरा नामक स्थान पर हुआ था । स्वामी जी का बचपन का नाम मूल शंकर था । स्वामी जी ने अपनी प्रारभिक शिक्षा संस्कृत भाषा में ग्रहण की। उस समय भारत विदेशी शासन के अधीन था ।समाज में फैली  कुरीतियों एवं अंधविश्वास को देखकर उनका मन विचलित हो जाता था । स्वामी जी ने 21 वर्ष की आयु में ही अपने घर-परिवार को छोड़कर वैराग्य धारण कर लिया । इसी दौरान मथुरा में सन्त विरजानंद जी से इनकी मुलाकात हुई । स्वामी दयानंद उन्हें अपना गुरु मान लिया। उन्होंने समस्त वेदों व उपनिषदों का अध्ययन किया । अपने देश-भ्रमण के दौरान ही उन्होंने आर्य-समाज की स्थापना की। उनमें देश-प्रेम व राष्ट्रीय भावना कूट-कूटकर भरी हुई थी।समाज में व्याप्त बाल-विवाह जैसी कुरीतियों का उन्होंने खुले शब्दों में विरोध किया।स्वामी दयानंद सरस्वती जी को अपनी मातृभाषा हिंदी से विशेष लगाव था।उनका संपूर्ण जीवन तप और साधना पर आधारित था। उन्हें राष्ट्र कभी भी भूला नहीं पाएगा।


Activity लौह पुरुष पेज 13 शब्दार्थ

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