https://notebooklm.google.com/notebook/07223ba2-3114-4d89-aade-fc8f6c957523?authuser=2
अँधेर नगरी - कठिन शब्दों के अर्थ
हलवाई - मिठाई बनाने वाला
फरियादी -शिकायत करने वाला
भिश्ती - मशक में पानी ढोने वाला व्यक्ति
मशक - यह एक चमड़े का थैला होता है जिसमें पानी भरकर ले जाया जाता है.
भिक्षा -भीख
भाजी-साग-सब्ज़ी
खाजा- मैदे से बने एक प्रकार की मिठाई
टका -रुपया,चाँदी का सिक्का
चौपट - मूर्ख
संकट - मुसीबत
दुहाई - दया की गुहार लगाना
दोष - कसूर
कारीगर - राजमिस्त्री
गुलाम -नौकर
कसाई- पशुओं को काटने वाला
गड़रिया - भेड़,बकरी चराने वाला या पालने वाला
ख्याल - विचार
कोतवाल- थानेदार
नाहक - बिना वजह
आफ़त - मुसीबत
हुक्म -आदेश
हुज्जत -बेमतलब का बहस करना
चकित -हैरान
घड़ी - समय
भारतीय उपमहाद्वीप का एक पारम्परिक वज़न का माप है। आधुनिक वज़न के हिसाब से ऐक सेर लगभग ९३३ ग्राम के बराबर है, यानि एक किलोग्राम से ज़रा कम।
टका - तांबे का सिक्का
अँधेर नगरी - कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ (Meaning) | ||
|---|---|---|---|
| 1. | टका | ताँबे का पुराना सिक्का | |
| 2. | भिश्ती | मशक में पानी ढोने वाला व्यक्ति | |
| 3. | गुलाम | दास, नौकर | |
| 4. | मशक | खाल का बना पानी भरने का थैला | |
| 5. | नाहक | बिना वजह | |
| 6. | हुज्जत | जुबानी लड़ाई-झगड़ा | |
| 7. | महंत | एक धार्मिक गुरु या साधु | |
| 8. | भिक्षा | भीख या दान में प्राप्त वस्तु (जैसे भोजन) | |
| 9. | कुंजड़िन | सब्जी बेचने वाली स्त्री | |
| 10. | सेर | वजन मापने की पुरानी इकाई | |
| 11. | खाजा | एक प्रकार का मीठा पकवान या मिठाई | |
| 12. | फरियादी | वह व्यक्ति जो न्याय के लिए शिकायत करता है | |
| 13. | बनिया | व्यापारी या दुकानदार , जैसे कल्लू बनिया) | |
| 14. | कारीगर | हुनरमंद मजदूर या शिल्पकार | |
| 15. | कोतवाल | नगर का मुख्य पुलिस अधिकारी |
इन शब्दों के माध्यम से, "अँधेर नगरी" की विशेषताएँ सामने आती हैं, जहाँ हर वस्तु (जैसे खाजा या भाजी) एक ही दर (टका सेर) पर मिलती है, और न्यायिक प्रक्रिया में दोषी (कोतवाल, कारीगर, भिश्ती) एक-दूसरे पर दोष मढ़ते हुए गुलाम की तरह पेश आते हैं।
-
टका: ताँबे का पुराना सिक्का।
- (यह शब्द गोबर्धनदास द्वारा वस्तुओं के भाव पूछते समय आता है, जब उसे पता चलता है कि सभी वस्तुएँ एक ही दर पर बिक रही हैं - "टके सेर")।
-
भिश्ती: मशक में पानी ढोने वाला व्यक्ति।
- (संदर्भ: चूनेवाले पर दोष लगाया जाता है कि भिश्ती ने चूने में ज़्यादा पानी डाल दिया, जिससे दीवार कमजोर हो गई)।
-
गुलाम: दास, नौकर।
- (संदर्भ: भिश्ती राजा से कहता है, "महाराज, गुलाम का कोई कसूर नहीं...")।
-
मशक: खाल का बना पानी भरने का थैला।
- (संदर्भ: भिश्ती बताता है कि कसाई ने मशक इतनी बड़ी बना दी थी कि उसमें पानी ज़्यादा आ गया)।
-
नाहक: बिना वजह।
- (संदर्भ: गोबर्धनदास चिल्लाता है कि वह "नाहक मारा जाता हूँ" और गुरुजी ने उसे "नाहक यहाँ रहने को मना किया था")।
-
हुज्जत: जुबानी लड़ाई-झगड़ा।
- (संदर्भ: जब महंत और गोबर्धनदास दोनों फाँसी चढ़ने के लिए बहस करते हैं, तो सिपाही हैरान होते हैं कि दोनों "हुज्जत करते हैं")।
- टका
- अर्थ: ताँबे का पुराना सिक्का।
- (यह उस दर को दर्शाता है जिस पर गोबर्धनदास को सभी वस्तुएँ मिलती हैं: "टके सेर")।
- भिश्ती
- अर्थ: मशक में पानी ढोने वाला व्यक्ति।
- (यह व्यक्ति न्यायिक शृंखला में आता है क्योंकि उसने चूने में ज़्यादा पानी डाला था, जिससे दीवार कमजोर हुई)।
- गुलाम
- अर्थ: दास, नौकर।
- (भिश्ती राजा के सामने स्वयं को "गुलाम" कहता है और अपना कसूर नहीं मानता)।
- मशक
- अर्थ: खाल का बना पानी भरने का थैला।
- (भिश्ती इस पर दोष डालता है, कहता है कि कसाई ने मशक इतनी बड़ी बना दी थी)।
- नाहक
- अर्थ: बिना वजह।
- (गोबर्धनदास तब इस शब्द का प्रयोग करता है जब उसे फाँसी के लिए पकड़ा जाता है, यह कहकर कि वह "नाहक मारा जाता हूँ")।
- हुज्जत
- अर्थ: जुबानी लड़ाई-झगड़ा।
- (महंत और गोबर्धनदास फाँसी पर पहले चढ़ने के लिए आपस में जो बहस करते हैं, उसे सिपाही "हुज्जत" कहते हैं)।
- भिक्षा
- अर्थ: भीख या दान में मिला भोजन/धन।
- (महंत अपने शिष्यों को नगर में "भिक्षा" माँगने के लिए भेजते हैं)।
- कुंजड़िन
- अर्थ: सब्जी बेचने वाली स्त्री।
- (गोबर्धनदास सबसे पहले इसी व्यक्ति से वस्तुओं का भाव पूछता है)।
- खाजा
- अर्थ: खाने की मीठी वस्तु, पकवान, या मिठाई।
- (यह शब्द नाटक की प्रसिद्ध पंक्ति 'टके सेर भाजी, टके सेर खाजा' में आता है, जिसका अर्थ है कि सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ सस्ते हैं)।
- कोतवाल
- अर्थ: नगर का मुख्य पुलिस अधिकारी।
- (न्याय की शृंखला में, गड़रिया कोतवाल की सवारी पर दोष डालता है, और अंत में कोतवाल को फाँसी का हुक्म होता है)।



No comments:
Post a Comment