16.चाँद का कुर्ता
यह कविता रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित कविता "चाँद का कुर्ता" के अंश प्रस्तुत करता है, जिसमें चन्द्रमा अपनी माता से जाड़े से बचने के लिए ऊन का एक मोटा झिंगोला (कपड़ा) सिलवाने की जिद करता है। चाँद अपनी माता को बताता है कि रात भर चलने वाली तेज़ हवा के कारण उसे ठंड लगती है और वह ठिठुर-ठिठुर कर अपनी यात्रा पूरी करता है। इसके उत्तर में, माता प्रेमपूर्वक चाँद की सुरक्षा की कामना करती है, लेकिन एक व्यावहारिक चिंता व्यक्त करती है। माता समझाती है कि चाँद का आकार कभी भी स्थिर नहीं रहता; वह रोज़ घटता-बढ़ता रहता है, जिससे उसके लिए एक उपयुक्त नाप का कपड़ा सिलना असंभव है। इस प्रकार, यह कविता सरल भाषा और काव्यात्मक संवाद के माध्यम से चाँद के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करती है।
https://youtu.be/ZP0FRGkhC7w?si=YeoWblZz1DnJC380
हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से वह बोला,
सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला ।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफ़र और यह मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुर्ता ही कोई भाड़े का ।
बच्चे की सुन बात कहा माता ने, अरे सलोने!
कुशल करें भगवान, लगे न तुझको जादू-टोने।
जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हूँ,
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।
घटता-बढ़ता रोज़ किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।
अब तू ही तो बता, नाप तेरा किस रोज लिवायें,
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज़ बदन में आए ?
- रामधारी सिंह दिनकर
शब्दार्थः
झिंगोला-पहनने का कपड़ा,
भाड़े-किराए,
अंगुल-अँगूठे से लेकर छोटी अंगुल तक का नाप,
फुट- नापने की इकाई
"सलोने" शब्द का अर्थ होता है **सुंदर**, **आकर्षक** या **लुभावना**। यह विशेष रूप से किसी व्यक्ति या चीज़ की खूबसूरती या आकर्षण को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे कि "सलोनी लड़की" का मतलब होता है एक बहुत ही सुंदर लड़की।
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