Thursday, January 1, 2026

कोशिश करने वालों..... VBQ

 बातचीत के लिए 

प्रश्न 1.चींटी से हम क्या सीख सकते हैं? सोचकर बताइए।
उत्तर:
चींटी से हम लगातार परिश्रम करना सीखते हैं: तथा बार-बार गिर कर उठने संभल जाने और आगे बढ़ जाने की सीख भी लेते हैं।

प्रश्न 2.नन्हीं सी चींटी भी इतनी मेहनत क्यों करती होगी?
उत्तर:
नन्हीं सी चींटी अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए इतनी मेहनत करती होगी।

प्रश्न 3.क्या मनुष्य असफल होकर भी सीख सकता है? कैसे?

उत्तर:
अगर मनुष्य के अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो वह असफल होकर भी सीख सकता है। मनुष्य को अपने अंदर की कमजोरी को सुधार कर निरंतर प्रयास करते रहने से सफलता जरूर मिलती है।

प्रश्न 4.मोती गहरे पानी में ही मिलता है। इस पंक्ति के माध्यम से क्या कहने की कोशिश की गई है?
उत्तर:
इस पंक्ति के माध्यम से यह कहने की कोशिश की गई है कि जिस प्रकार एक गोताखोर को मोती प्राप्त करने के लिए पानी की गहराई तक जाना पड़ता है उसी प्रकार हमें सफलता प्राप्त करने के लिए हर संघर्ष का सामना धैर्य तथा साहस से करना होगा।

आपकी कल्पना ( पृष्ठ संख्या – 108)

प्रश्न 1.यदि आप मकड़ी होते तो अपने लिए घर कैसे बनाते?
उत्तर:
यदि हम मकड़ी होते तो अपने लिए घर उसी प्रकार बनाते जैसे मकड़ी बनाती है। हम भी निरंतर प्रयास करते हुए अपने लिए घर बनाते।

प्रश्न 2.यदि आप गोताखोर होते तो आपका अनुभव कैसा होता?
उत्तर:
यदि हम गोताखोर होते तो हम भी एक गोताखोर की भाँति समुद्र में गोता लगाते और मोती वापस निकालकर लाते।

प्रश्न 3.यदि चींटी बोल सकती तो आप उससे क्या क्या पूछते? वह क्या – क्या जवाब देती? 

उत्तर- यदि चींटी बोल सकती तो हम उससे पूछते कि तुम लगातार इतना परिश्रम कैसे कर लेती हो। बार-बार गिरना, बार-बार उठना और मन में किसी तरह का अफसोस न रखना, इतनी हिम्मत तुम्हारे अंदर कहाँ से आती है? चींटी जवाब देती, “मैं अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए इतना परिश्रम करती हूँ। मेरे अंदर का विश्वास मुझे आगे बढ़ाती  है। तभी तो बार-बार गिर कर भी मैं अपनी मंजिल तक पहुँच जाती हूँ।

भाषा की बात (पृष्ठ संख्या – 109 )

प्रश्न 1.समान अर्थ वाले शब्दों का मिलान कीजिए-

उत्तर:

कोशिशप्रयास
नौकानाव
मोतीमाणिक
रंगोंनसों

प्रश्न 2.ध्यानपूर्वक पढ़िए-
1. स् + व = स्व
2. ट् + ठ – ट्ठ
कविता में ऐसे शब्द छाँटकर लिखिए जहाँ ‘स्व’, ‘ट्ठ’ संयुक्त व्यंजनों का प्रयोग हुआ है-
उत्तर:
स्व-स्वीकार
ट्ठ- मुट्ठी

प्रश्न 3.चार-चार शब्द लिखिए-

उत्तर:

संज्ञासर्वनामक्रियाविशेषण
नौकाउसकीहारनानन्हीं
चींटीतुमफिसलनागहरा
पानीकुछसुधारनाखाली
सिंधुइसीत्यागनाअसफलता

जीवन मूल्य 

प्रश्न 1.कविता में कहा गया है कि असफलताओं को चुनौती की तरह स्वीकार करना चाहिए। इससे क्या लाभ होगा?
उत्तर:
असफलताओं को चुनौती की तरह स्वीकार करने से व्यक्ति अपनी कमजोरियों को दूर करेगा और कठिन से कठिन कार्य को आसानी से कर सकेगा। असफल होने पर भी उसकी हिम्मत नहीं टूटेगी और उसकी संकल्प शक्ति बढ़ जाएगी। अंततः व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेगा।

प्रश्न 2.आप अपनी किस असफलता को चुनौती की तरह स्वीकार करेंगे?

उत्तर:
अगर हम अपनी कक्षा की वार्षिक परीक्षा में असफल हो जाएँगे तो उससे हम हार नहीं मानेंगे बल्कि पुनः परिश्रम करने के पश्चात् उसमें सफलता अवश्य हो  पाएँगे।

प्रश्न 3.ऐसा करने से आपको क्या लाभ होगा?
उत्तर:
ऐसा करने से हम दुनिया के सामने अपनी सफलता को सिद्ध कर सकेंगे तथा चारों ओर हमारा गुणगान हो सकेगा।

कुछ करने के लिए (पृष्ठ संख्या – 110 )

प्रश्न 1.ऐसी ही कोई अन्य प्रेरणा देने वाली कविता याद करके कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:

**"नयी राहों की ओर"**

सपने हैं जो आँखों में बसे,

सफलता का रास्ता कभी न रुकें,

मुसीबतें आएं या तूफ़ान हो,

हिम्मत से बढ़ते रहो, कभी न थकें।

वो रातें, वो अंधेरे जहाँ,

न उम्मीद थी, न कोई था पास,

पर दिल ने कहा, "चल, थाम ले तू,

हर कठिनाई को पार कर, देखो क्या पास!"

हर चोट, हर गिरावट, बस एक सिख है,

हर संघर्ष में कुछ खास है।

जो हारने से डर जाए, वो कभी नहीं जीता,

जो हार कर भी लड़े, वही असली विजेता है।

समय का पहिया भी चलता है,

एक दिन बदल जाएगा हर मोड़,

आगे बढ़ो, तुम खुद हो अपनी ताकत,

तुम हो वो सूरज, जो चमकेगा रोज़।

यह कविता हमें यही सिखाती है कि मुश्किलें आती हैं, लेकिन अगर हम निरंतर मेहनत करें और अपनी कोशिशें जारी रखें, तो हम किसी भी रुकावट को पार कर सकते हैं।


प्रश्न 2.
अँगूठे या अंगुलियों के निशान, काला पैन आदि की सहायता से कुछ चींटियाँ बनाइए।
उत्तर:
छात्र / छात्राएँ स्वयं करें।

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