बुद्धिमान राजा Q/A
1.चीन का राजा भारत जाने की दिशा और रास्ता क्यों जानना चाहता था?
चीन का राजा भारत पर आक्रमण करने के लिए इसकी दिशा और रास्ता जानना चाहता था।
2.चीन के राजा ने सैनिकों की भर्ती क्यों शुरू कर दी?
चीन के राजा ने अपने राज्य का विस्तार करने के लिए सैनिकों की भर्ती शुरू कर दी।
3.वृद्ध के साथी ज़ोर-ज़ोर से क्यों रोने लगे?
वृद्ध के साथियों को जब यह लगा कि वे अब इस जन्म में अपनी मातृभूमि भारत को कभी नहीं देख सकेंगे तब यह सोचकर वे ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे।
4.कलिंग के राजा ने गुप्त बैठक क्यों बुलाई?
कलिंग के राजा ने अपने राज्य को चीन के राजा के आक्रमण से बचाने के लिए बुद्दिमान व्यक्तियों से विचार-विमर्श करने के लिए गुप्त बैठक बुलाई।
5.कहानी के आधार पर बताइए, किसने किसे कहा?
क ) "युद्ध सैनिक बल से नहीं बुद्दि बल से जीते जाते हैं।"
बुद्दिमान व्यक्तियों ने किलिंग के राजा से कहा।
ख) "भारत जाने की दिशा और सही रास्ता बताओ।"
चीन के राजा ने बंदियों से कहा।
ग) "फल भी रास्ते में सूख गए।"
दूसरे वृद्ध व्यक्ति ने चीन के राजा से कहा।
बातचीत के लिए
1.कलिंग को बुद्धि बल के उपयोग से बचाया गया। राजा ने बुद्धिमान व्यक्तियों के सुझाव पर एक नौका में वृद्धों, सुइयों और सूखे फलों को सिंगापुर भेजा। वृद्धों ने चीनी राजा को यह विश्वास दिलाया कि भारत इतनी दूर है कि रास्ते में ही लोहे की छड़ें सुइयाँ बन गईं, और वे स्वयं जवान से बूढ़े हो गए। चीनी राजा ने तब अपने सैनिकों की मृत्यु के भय से वापस लौटने का निर्णय लिया।इस प्रकार कलिंग को बचाया गया।
2. वृद्ध ने भारत की दूरी बताने के लिए क्या-क्या कहा?
वृद्धों ने राजा को बताया कि भारत बहुत दूर है। उन्होंने कहा कि वे जवान चले थे और यहाँ आते-आते बूढ़े हो गए, तथा कई साथी मर गए। दूरी साबित करने के लिए, उन्होंने सुइयाँ दिखाईं, जो वर्षों की यात्रा में लोहे की छड़ों से गलकर बनी थीं। दूसरे वृद्ध ने एक सूखा फल दिखाया, जिसके बीज रास्ते में वृक्ष बने, फल दिए और फिर सूख गए।
आपकी कल्पना
1.क) लोहे की छड़---- कील
ख) चादर -------- धागा या रुमाल
ग) तरबूज ------- बीज या अंगूर
घ) तलवार - ------ सूई या चाकू
भाषा की बात
1.कोष्ठक में सामने दिए गए शब्दों का सही रूप लिखकर वाक्य पूरा कीजिए।
क) पड़ोसी राजाओं ने बिना लड़े ही हार मान ली। ( हारना)
ख) राज्य के बुद्दिमान व्यक्तियों की एक बैठक बुलाई। (बुलाना)
ग)उसने शीघ्र उस पर काम शुरू कर दिया। ( करना)
घ) राजा को वह सुझाव बहुत पसंद आया। ( आना)
ङ) फल भी रास्ते में सूख गए। ( सूखना)
2.जो शब्द किसी मूल शब्द के पीछे जुड़कर नया शब्द बनाते हैं और उनके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं,उन्हें 'प्रत्यय' कहते हैं।
जैसे - बुद्धि + मान= बुद्धिमान
क) भारत+ ईय = भरतीय
ख) सेना +इक= सौनिक
ग) विजय+ई= विजयी
घ) पराजय+इत = पराजित
निर्दयी-निर्दय+ ई, साहसी-साहस+ ई , स्वाभिमानी-स्वाभिमान+ई
पड़ोसी- पड़ोस+ ई , विजयी-विजय +ई भारतीय (भारत + ईय) प्रशिक्षित (प्रशिक्ष + इत)
जीवन मूल्य
किसी भी विकट परिस्थिति में यदि सोच-समझकर समस्या का हल ढूँढा जाय तो शायद आसानी से मिल जायगा।
सोचकर बताइए कि क्या कभी आपने भी ऐसे ही सोच-समझकर समस्या सुलझाई है?
हाँ, एक बार मेरी माँ ने मुझे स्कूल का प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए समय नहीं दिया था, क्योंकि घर के कई काम थे। मैंने सोचा कि अगर मैं पहले घर के छोटे-छोटे काम खत्म कर लूँ, तो बाद में बिना किसी तनाव के प्रोजेक्ट पर ध्यान दे सकूँगा। मैंने पहले सभी काम किए और फिर आराम से प्रोजेक्ट पूरा किया। इस सोच-समझ के तरीके से मैंने आसानी से समस्या सुलझा ली।
कुछ करने के लिए
1.भारत के कुछ राजओं और उनके बुद्धिमान मंत्रियों के कुछ रोचक किस्से लिखिए ।
भारत के इतिहास और लोककथाओं में कई ऐसे राजा और उनके बुद्धिमान मंत्री हुए हैं जिनकी कहानियाँ आज भी लोगों को प्रेरणा और हँसी दोनों देती हैं। नीचे कुछ प्रसिद्ध राजाओं और उनके मंत्रियों से जुड़ी रोचक कहानियाँ दी गई हैं:
1. **विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय और उनके मंत्री तेनालीरामन**
**कहानी:**
एक बार राजा कृष्णदेवराय बहुत प्रसन्न थे, उन्होंने अपने दरबार में घोषणा की —
"जो मुझे सबसे मज़ेदार झूठ बोलेगा, उसे इनाम मिलेगा।"
सब दरबारी अजीब झूठ बोलने लगे — कोई कहता, “मैं चाँद पर घूमकर आया हूँ।” कोई कहता, “मैंने मछली को उड़ते देखा।”
पर राजा प्रभावित नहीं हुए।
तभी तेनालीरामन आगे बढ़े और बोले —
“महाराज, मैंने आपसे दस हज़ार सोने के सिक्के उधार लिए थे, उन्हें लौटाने आया हूँ।”
राजा बोले — “मैंने तुम्हें कोई सिक्के नहीं दिए थे!”
तेनाली मुस्कुराए — “बस महाराज, यही तो मेरा झूठ था।”
राजा ठहाका लगाकर हँस पड़े और तेनालीरामन को विजेता घोषित किया।
**संदेश:** बुद्धि और हाजिरजवाबी कई बार तलवार से अधिक प्रभावशाली होती है।
2. **अकबर और बीरबल**
**कहानी:**
एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा —
“बीरबल, दुनिया में सबसे बड़ा झूठ कौन-सा है?”
बीरबल ने कहा — “महाराज, जब कोई कहता है ‘मैंने झूठ कभी नहीं बोला’, वही सबसे बड़ा झूठ है।”
दरबार में सभी हँस पड़े, और अकबर को भी बीरबल की समझदारी पर गर्व हुआ।
**संदेश:** सच्चाई यह है कि हर इंसान कभी न कभी झूठ बोलता है — बुद्धिमान वही है जो इस सच्चाई को समझे।
3. **राजा भोज और पंडित कालिदास**
**कहानी:**
एक बार राजा भोज को लगा कि दरबार में सभी उनकी प्रशंसा सिर्फ चापलूसी के लिए करते हैं।
उन्होंने एक परीक्षा रखी — जो उनके जैसा ज्ञान, कला और काव्य में श्रेष्ठ हो, वही सिंहासन पर बैठेगा।
सभी डर गए, पर कालिदास आगे बढ़े और बोले —
“महाराज, राजा वही होता है जो अपनी प्रजा को अपने समान मानता है। आज आप मुझे सिंहासन पर बैठने दे रहे हैं, इससे सिद्ध होता है कि आप सच्चे राजा हैं।”
राजा भोज मुस्कुरा उठे और कालिदास को गले लगा लिया।
**संदेश:** सच्चा राजा वही है जो अपने ज्ञान और विनम्रता से बड़ा बनता है, केवल पद से नहीं।
4. **विक्रमादित्य और बेताल**
**कहानी:**
राजा विक्रमादित्य हर रात श्मशान में जाकर बेताल को पकड़ने जाते थे। हर बार बेताल कोई पहेली सुनाता, और विक्रम उसका उत्तर दे देते।
एक दिन बेताल ने पूछा —
“राजा, अगर किसी व्यक्ति के सामने सत्य और करुणा में से एक चुननी पड़े, तो क्या चुने?”
राजा ने कहा — “करुणा, क्योंकि करुणा में ही सच्चे सत्य का हृदय बसता है।”
बेताल मुस्कुराया — “राजन, आपकी यही करुणा ही आपको सच्चा राजा बनाती है।”
**संदेश:** बुद्धिमत्ता का मूल संवेदनशीलता और करुणा है।
5. **राजा जयसिंह और पंडित सोमेश्वर**
**कहानी:**
जयपुर के संस्थापक महाराजा जयसिंह द्वितीय न केवल योद्धा थे, बल्कि महान खगोलशास्त्री भी थे।
एक बार पंडित सोमेश्वर ने उनसे कहा —
“महाराज, जो आकाश को नाप सके, वही सच्चा ज्ञानी है।”
जयसिंह ने तुरंत जयपुर में **जंतर मंतर** बनवाया — जहाँ बिना दूरबीन के, केवल गणित से ग्रह-नक्षत्रों की गणना होती थी।
यह देखकर पंडित सोमेश्वर बोले — “अब मुझे ज्ञात हुआ कि आपका मस्तिष्क ही आपका सबसे बड़ा अस्त्र है।”
**संदेश:** सच्चा बुद्धिमान वह है जो विज्ञान और धर्म दोनों में संतुलन बनाए रखे।