बेट्टिना का साहस
बेट्टिना बेचगार्ड, लंदन, इंग्लैंड में रहती है। वह नृत्य नाटिकाओं में प्रमुख भूमिकाएँ निभाती है। नृत्य उसका शौक और आय दोनों का साधन है।
जब वह उन्नीस वर्ष की थी तब उसके साथ एक भयानक दुर्घटना हुई।
उसके माता-पिता उन दिनों इंग्लैंड के एक दूसरे नगर में रहते थे।
उस दिन अवकाश था। वह पूरा आराम करना चाहती थी।
वह भोजन की सामग्री लेने के लिए घर से बाहर निकली।
वह पैदल चलने वाले के लिए सुरक्षित रास्ते से सड़क पार कर रही थी।
तेज गति से आ रही एक कार ने उसे टक्कर मारी।
वह गाड़ी के ऊपर गिरी और आगे के शीशे से टकराई।
शीशा चूर-चूर हो गया, कार चालक ने तेजी से ब्रेक लगाई।
बेट्टिना लगभग तीन मीटर ऊँचा उछली।
सड़क पर लगी लोहे की सुरक्षा बाड़ से टकराकर वह धड़ाम से सड़क पर गिरी, उसका सिर फट गया। चेहरा लहू-लुहान हो गया।
टाँग के निचले हिस्से में बहुत चोट लगी, वह बुरी तरह घायल थी। शरीर का प्रत्येक भाग जख्मी था। वह अचेत हो गई।
1. बेट्टिना कहाँ रहती थी?
2.वह किसमें प्रमुख भूमिकाएँ निभाती थी?
3.उसका शौक क्या था?
4.उन्नीस वर्ष की उम्र में उसके साथ क्या हुआ?
5.उसके माता-पिता कहाँ रहते थे?
6.वह घर से बाहर किस लिए निकली थी?
7.वह किस रास्ते से सड़क पार कर रही थी?
8.उसे किसने टक्कर मारी?
9.वह किससे टकराई?
10.बेट्टिना लगभग कितने मीटर ऊँचा उछली?
11.वचन बदलो- भूमिकाएँ सामग्री सड़क टाँग चोट शरीर
12.प्रत्यय अलग करो - सुरक्षित, जख्मी
13.उपसर्ग अलग करो - सुरक्षा, प्रत्येक, सुरक्षित
14.विलोम शब्द - साहस
15. दुर्घटना की तरह अन्य शब्द लिखो जिसमें दुर् उपसर्ग लगा हो-
दुर्दशा,दुर्गुण, दुरुपयोग,दुर्दिन,दुर्जन
दुष्परिणाम,
सड़क की दूसरी ओर से एक और कार आ रही थी। उसमें लंदन के सुप्रसिद्ध चिकित्सक टेरेंस लेविस और उसकी पत्नी
जिल्ल सवार थे। उन्होंने हवा में उछलती बेटिना को देखा और कार रोक दी। उनकी पत्नी ने कार-फोन से एम्बुलेंस को
सूचना दी। जब डॉक्टर लेविस उसके पास पहुँचे तो उसकी नाड़ी नहीं चल रही थी। एक अन्य कार चालक डैनफोर्ड ने
अपनी कार राकी और दुर्घटना स्थल पर पहुँचा। उसने बेट्टिना को साँस देने का प्रयत्न किया। कुछ देर के बाद उसकी
नाड़ी फिर से चलने लगी। उसे एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचाया गया।
डेढ़ घंटे बाद उसके माता-पिता अस्पताल पहुंचे। बेटटिना जीवित थी, लेकिन पूरा शरीर बुरी तरह घायल था। दाई टाँग
आठ और बाई भूजा दो जगह से टूट गई थी। खोपड़ी में गहरी चोट थी। शरीर के अन्य हिस्सों में गहरे घाव थे। कई घंटों
के अथक प्रयास और शल्य चिकित्सा द्वारा चिकित्सकों ने उसे नया जीवन दिया।
1.टेरेंस लेविस कौन थे?
2.उनकी पत्नी ने क्या किया?
3.किसने बेट्टिना को साँस देने का प्रयत्न किया?
4.बेट्टिना को किससे अस्पताल पहुँचाया गया?
5.उसके माता-पिता कितने घंटे बाद अस्पताल पहुंचे?
6.बेट्टिना को नया जीवन कैसे मिला?
अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे वह छत को निहारती और सोचती कि शायद अब वह कभी नृत्य नहीं कर पाएगी।
यह सोचकर उसकी आँख से बेबसी के आँसू बहने लगते। अक्सर उसके मन में यह विचार आता कि संकल्प और अभ्यास
से एक दिन फिर वह पहले की तरह नृत्य नाटिकाओं में नृत्य कर पाएगी। उसकी समस्याओं का यहीं अंत नहीं था।
अधिक दवाओं के कारण उसके गुर्दे में खराबी आ गई। वह सोचती जब घिसट-घिसटकर ही जीना है तब वह बची ही क्यों?
बेटटिना कहती है, “एक दिन मैं बहुत निराश थी, जीवन में कहीं कोई आशा की किरण शेष नहीं थी।
मैं सुबक-सुबक कर रोने लगी। मेरी एक सेविका ने निराशाजनक बातें सुनी। प्यार से उसने मेरे सिर को सहलाते हुए
कहा-तुम्हारा नया जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ है। उसके इन शब्दों ने मेरी सोचने की दिशा ही बदल दी।"
1.अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे वह क्या देखती?
2.अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे वह सोचती थी?
3.क्या सोचकर उसकी आँख से बेबसी के आँसू बहने लगते?
4.अक्सर उसके मन में क्या विचार आता था?
5.उसके गुर्दे में खराबी क्यों आ गई?
6.किसने उसकी निराशाजनक बातें सुनी?
7.सेविका की किन शब्दों ने बेट्टिना की सोचने की दिशा ही बदल दी?
चिकित्सकों ने बेटिना को बिस्तर पर ही लेटे रहने की सलाह दी। चिकित्सकों की सलाह न मानते हुए वह एक टाँग की
सहायता से शौचालय जाने लगी। उसे भयंकर पीड़ा होती, लेकिन वह ऊफ तक नहीं करती। धीरे-धीरे उसकी टाँगों में गति और लचक बढ़ने लगी। एक माह अस्पताल में रहने के बाद वह घर लौट आई। उसके माता-पिता टाँगों की मालिश
के लिए उसे निकट के एक तरण-ताल में ले जाने लगे। वह घर में अनेक प्रकार की शारीरिक अभ्यास करती। उसने कदम
से कदम मिलाकर जब चलने का प्रयास किया तो दर्द से चिल्ला उठी। कुछ दिन के असहनीय दर्द को झेलने के बाद
उसकी टाँगों में शक्ति का संचार होने लगा।
इस मोड़ पर उसके जीवन में शिक्षक बेरी का प्रवेश हुआ। बैरी उसकी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प शक्ति से परिचित था।
बेट्टिना ने उसके सामने नृत्य केंद्र में जाने की इच्छा व्यक्त की। बैरी ने उसे हर तरह सहयोग का आश्वासन दिया।
छह माह की कठोर साधना के बाद जब उसने संगीत की लय और ताल के साथ नृत्य का पहला कदम रखा तो उसे बहुत
कठिनाई हुई। धीरे-धीरे एक वर्ष बीत गया। उसकी दाई टाँग में लगे धातु के टुकड़े हटा दिए गए। इससे उसको अपनी
टाँगों का संतुलन बनाने में सहायता मिलने लगी। सफलता अभी दूर थी। वह प्रयास करती रही। दो वर्ष बाद उसने कुछ
क्षण के लिए नृत्य नाटिका में काम किया। उसकी सफलता में समूचा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
धीमे-धीमे बेट्टिना फिर उसी शिखर पर पहुँच गई जिस पर वह दुर्घटना से पहले थी।
बेट्टिना ने अपने प्रयासों से सिद्ध कर दिया-जहाँ चाह वहाँ राहा ।
1. उसे भयंकर पीड़ा क्यों होती थी?
2.कितने महीने अस्पताल में रहने के बाद वह घर लौट आई?
3.उसके माता-पिता टाँगों की मालिश के लिए उसे कहाँ ले जाते थे?
4.बेरी कौन थे?
5.बोरी बटटिना के किस गुण से परिचित थे?
6.बैरी ने बटटिना किस बात का आश्वासन दिया?
7.कितने साल बाद उसकी दाई टाँग में लगे धातु के टुकड़े हटा दिए गए?
8.धातु के टुकड़े हटा दिए जाने के बाद बेट्टिना को क्या फ़ायदा हुआ?
9. बेट्टिना ने अपने प्रयासों से क्या सिद्ध कर दिया?
शब्दार्थः सामग्री-सामान, चिकित्सक-इलाज करने वाला
शब्दार्थः संकल्प-निश्चय
No comments:
Post a Comment