पाठ 16 चाँद का कुर्ता
1. ध्यानपूर्वक पढ़िए-
बच्चे की सुन बात कहा माता ने, अरे सलोने!
कुशल करें भगवान, लगे न तुझको जादू टोने।
(क) कविता की इन पंक्तियों में माता क्या प्रार्थना कर रही है?
माँ यह प्रार्थना कर रही है कि भगवान उसके बच्चे का कुशल करे और उसको किसी का जादू-टोना न लगे।
(ख) क्या आपकी दादी माँ भी कभी आपकी नजर उतारती हैं, कैसे?
हाँ,मैं जब छोटा था तो मेरी दादी मेरे माथे पर काला टीका लगाकर मेरी नज़र उतारती थी।
2. दिए गए विशेषण शब्दों के लिए तीन-तीन विशेष्य और लिखिए-
(क) सुंदर- आदमी, कंबल, कपड़ा
(ख) चौड़ा - रास्ता, पत्ता, सीना, माथा
(ग) छोटा- घर, बच्चा, आदमी
3. दिए गए शब्दों के लिए दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(क) भगवान-परमेश्वर, ईश्वर
(ख) बदन- शरीर ,तन ,काया
(ग) आसमान - आकाश , गगन
(घ) चाँद- चंदमा, राकेश
(ङ) धरती- धरा, पृथ्वी
4. नीचे दिए गए वाक्यों को सही कारक शब्द चुनकर पूरा कीजिए-
का, में, से, ने
(क) एक दिन चाँद माता से बाला।
(ख) यह जाड़े का मौसम है।
(ग) बच्चे की बात सुनकर माता ने कहा।
(घ) एक नाप में तुझे कभी नहीं देखा।
5. दिए गए शब्दों के विपरीत शब्द लिखिए-
(क) छोटा-बड़ा
(घ) घटता-बढ़ता
(ख) पतला-मोटा
(ङ) सरदी-गरमी
(ग) रात-दिन
(च) अनेक-एक
6. लिखिए, इन्हें क्या कहते हैं-
(क) जो कपड़े सिलता हो-- दर्ज़ी
(ख) जो लकड़ी का काम करे- बढ़ई
(ग) जो लोहे का काम करे - लोहार
(घ) जो गहने बनाए - सुनार
(ङ) जो इलाज करता हो -डॉक्टर
7. 'चंद्र ग्रहण' कैसे लगता है? लिखकर चित्र भी बनाइए-
जब पृथ्वी, सूर्य, और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं. इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और चंद्रमा छिप जाता है।
जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है, जिसके कारण सूर्य से चन्द्रमा पर पहुँचाने वाला प्रकाश पृथ्वी के द्वारा प्रतिबंधित हो जाता है. चन्द्र ग्रहण पूर्णिमा की रात में होता है।
8.बताइए, इस दिन चाँद की स्थिति कैसी होती है?
- होली
- बुद्ध पूर्णिमा
- गुरु पूर्णिमा
- रक्षाबंधन
- गुरु नानक जयंती
डायरी लेखन: ईद का अनुभव
तारीख: [आप जिस ईद की तारीख लिखना चाहें] दिन: [दिन का नाम] समय: रात 9:30 बजे
आज का दिन सचमुच खास था। मुझे खुशी है कि मैंने मेरे प्रिय मित्र सुहेल के निमंत्रण पर उसके साथ ईद मनाई। मैं पहले कभी इस त्योहार में शामिल नहीं हुआ था, और यह अनुभव मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा शानदार रहा।
सुबह से ही घर में एक अलग ही उत्साह था। सुहेल के घर पहुंचते ही, मैंने देखा कि हर तरफ कितनी अच्छी सजावट थी। रंग-बिरंगे पर्दे, नई रोशनी, और पूरे घर में एक मीठी-सी खुशबू फैली हुई थी।
सबसे पहले, मैंनेसुहेल और उनके परिवार को गले मिलकर 'ईद मुबारक' कहा। उनके माता-पिता ने मुझे इतनी गर्मजोशी से गले लगाया, मानो मैं भी उनके परिवार का हिस्सा हूँ। यह एहसास बहुत ही अच्छा था।
🍲 ज़ायकेदार दावत
दोपहर का खाना तो जैसे शाही दावत थी! मैंने आज तक इतनी बेहतरीन सेवइयां (मीठी और दूध वाली) कभी नहीं खाई थीं। इसके अलावा, बिरयानी और तरह-तरह की मिठाइओं का स्वाद तो मैं भूल ही नहीं पाऊँगा।सुहेल की माँ ने हर चीज़ इतने प्यार से बनाई थी कि खाने का मज़ा दोगुना हो गया।
🎁 ईदी और प्यार
शाम को सबसे प्यारी रस्म हुई— ईदी। मुझे बच्चों को ईदी देते देखना बहुत अच्छा लगा। यह बस पैसे नहीं थे, बल्कि यह उनके प्रति प्यार और आशीर्वाद व्यक्त करने का एक तरीका था। [मित्र का नाम] के अब्बा ने भी मुझे आशीर्वाद के साथ एक छोटा-सा तोहफा दिया, जिससे मुझे लगा कि मैं सचमुच इस खुशियों भरे पल का हिस्सा हूँ।
✨ एकता और भाईचारा
पूरे दिन मैंने एक चीज़ महसूस की, वह थी भाईचारे और एकता की भावना। यह त्योहार सिर्फ धर्म का नहीं है, बल्कि यह लोगों को करीब लाने, गिले-शिकवे भुलाने और खुशी बाँटने का त्योहार है। सब लोग एक-दूसरे से मिल रहे थे, हँस रहे थे और एक-दूसरे को मुबारकबाद दे रहे थे।
यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा। मुझे अब समझ आया कि ईद इतनी खुशी और उत्साह क्यों लाती है।
आज का दिन मेरे लिए अविस्मरणीय था।
[आपका नाम]
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