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अपठित पद्यांश
http://bit.ly/2N4TqIZ
अपठित पद्यांश
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नीर वाटिका अश्व
निशान पट आकाश
नभ घोटक अंबु
राकेश पेड़ सदन
आवास वस्त्र
पादप
जल वृक्ष वसन
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रंक,
निर्यात,
शत्रु,
अनादर
दिन, दानव
सम्मान, दानी
विराग, निराशा
रानी, भाई
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अगर न नभ में बादल होते- कविता में से 1. बादल कहाँ से जल भरकर लाते हैं? बादल सिंधुं से जल भरकर लाते हैं। 2. नभ में बादल आने पर मोर और ...